दैनिक भारतवर्ष | पटना ब्यूरो | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
उत्तर में बाढ़ की आहट, दक्षिण में बारिश का इंतजार: बिहार की दोहरी तस्वीर
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
बिहार में मानसून के इस सीजन में एक अनोखी और चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। राज्य दो अलग-अलग चरम मौसम परिस्थितियों से जूझ रहा है। एक तरफ जहाँ उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ उफान पर हैं और तराई वाले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं दक्षिण बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में किसान जरूरत के मुताबिक बारिश न होने से चिंतित हैं।
‘दैनिक भारतवर्ष’ की जमीनी पड़ताल बताती है कि मौसम के इस असंतुलन ने आम जनजीवन और कृषि व्यवस्था दोनों पर गहरा असर डाला है।
1. उत्तर बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, कटाव से दहशत
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

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कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल और मधुबनी के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।
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नदी किनारे बसे गांवों में भू-कटाव (River Erosion) की वजह से लोग अपनी झोपड़ियाँ और सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को विवश हैं।
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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी कटाव रोधी कार्य समय पर पूरे न होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
2. दक्षिण बिहार में धान की रोपनी प्रभावित
इसके ठीक विपरीत, दक्षिण बिहार के गया, औरंगाबाद, नवादा और बक्सर जैसे जिलों में मानसून की अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
“नहरों में आखिरी छोर तक पानी नहीं पहुँच रहा है और बारिश रुक-रुक कर हो रही है। अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा।”
— राम इकबाल सिंह, किसान (भोजपुर)
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे डीजल पंपों के सहारे खेती करने पर किसानों की लागत दोगुनी हो रही है।

शासन और प्रशासन का क्या है रुख?
आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित जिला प्रशासनों का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है:
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बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
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कृषि विभाग की ओर से किसानों को वैकल्पिक फसलों और आकस्मिक कृषि योजना (Contingency Crop Plan) की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दैनिक भारतवर्ष का निष्पक्ष दृष्टिकोण
बिहार में बाढ़ और सुखाड़ की यह समस्या नई नहीं है, लेकिन हर साल इसका स्वरूप अधिक जटिल होता जा रहा है। केवल तात्कालिक राहत शिविरों और मुआयनों से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि:
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नदियों के गाद (Silt) की सफाई और तटबंधों का मजबूत सुदृढ़ीकरण समय रहते किया जाए।
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जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं को अंतिम किसान तक पहुंचाया जाए ताकि कम बारिश में भी फसलें बचाई जा सकें।
दैनिक भारतवर्ष बिहार की जनता से जुड़े इस जमीनी मुद्दे पर लगातार नजर बनाए रखेगा।
