भर्ती परीक्षाओं में धांधली और देरी को लेकर झारखण्ड की राजनीति में उबाल। भाजपा ने CID जांच पर उठाए सवाल, तो आजसू ने रांची की सड़कों पर उतारा युवाओं का सैलाब।
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष
झारखण्ड की राजनीति में आज 30 जुलाई को युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा केंद्र बिंदु बन गया है।झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई है।एक तरफ जहां आजसू (AJSU) पार्टी के युवा और छात्र संगठन ने आज रांची में लोक भवन तक विशाल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने चल रही सीआईडी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर दी है।
रांची में प्रदर्शन कर रहे युवा और आजसू/भाजपा कार्यकर्ता (सांकेतिक/फाइल फोटो/दैनिक भारतवर्ष)
सीआईडी (CID) जांच संदेहास्पद, हो सीबीआई जांच: बाबूलाल मरांडी
जेपीएससी मुख्य परीक्षा और ओएमआर शीट जांच प्रकरण में सीआईडी (CID) की कार्रवाई को विपक्ष ने अपर्याप्त और संदेहास्पद करार दिया है।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व का आरोप है कि राज्य सरकार बड़े अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों को बचाने के लिए सीआईडी का इस्तेमाल ‘कवर-अप’ के तौर पर कर रही है। विपक्ष का कहना है कि जब तक किसी केंद्रीय स्वतंत्र एजेंसी (CBI) को इसकी जांच नहीं सौंपी जाती, तब तक लाखों अभ्यर्थियों को न्याय मिलना असंभव है।
आजसू का ‘लोक भवन मार्च’: सड़कों पर उतरे युवा
इधर राजधानी रांची में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। आजसू पार्टी के छात्र एवं युवा विंग ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत लोक भवन मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:
JPSC और JSSC की सभी लंबित परीक्षाओं का पारदर्शी और समयबद्ध आयोजन।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह पर सख्त कानूनी कार्रवाई।
लंबित परिणामों की त्वरित घोषणा और छात्र छात्रवृत्तियों का समय पर भुगतान।
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने रांची में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई जगह पुलिस बल की तैनाती की गई है।
JMM-कांग्रेस का पलटवार: ‘विपक्ष चला रहा भ्रामक एजेंडा’
गठबंधन सरकार (JMM-कांग्रेस) ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं का तर्क है कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और जो भी कमियां पाई गई हैं, उन पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
गठबंधन नेताओं का कहना है कि सीआईडी निष्पक्षता से अपनी जांच कर रही है और जेपीएससी के अधिकारियों से भी जवाब-तलब किया गया है। सरकार का दावा है कि विपक्ष आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए युवाओं के मुद्दों पर सिर्फ राजनीति चमकाने का प्रयास कर रहा है।
ज़मीनी हकीकत: अनिश्चितता के भंवर में छात्र
राजनीतिक बयानबाजी से इतर, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर झारखण्ड के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों पर पड़ रहा है। बार-बार परीक्षाओं का स्थगित होना, परिणाम में देरी और धांधली के आरोपों ने अभ्यर्थियों के मन में अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।
ग्राउंड जीरो पर छात्रों का कहना है कि उन्हें राजनीति नहीं, बल्कि पारदर्शी और साफ-सुथरी नियुक्ति प्रक्रिया चाहिए, ताकि उनकी सालों की मेहनत बेकार न जाए।
📝 दैनिक भारतवर्ष का निष्पक्ष दृष्टिकोण
राज्य के विकास और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए रोजगार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सबसे प्राथमिक शर्त है। जांच चाहे CID करे या CBI, प्राथमिक ध्येय यह होना चाहिए कि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई हो और निर्दोष अभ्यर्थियों का समय व विश्वास बर्बाद न हो।